Saturday, October 17, 2026

रयोकान और सुंदर चाँद

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ज़ेन गुरु रयोकान पहाड़ की तलहटी में बनी एक सुनसान झोपड़ी में बहुत सादा जीवन बिताते थे।

एक शाम, जब रयोकान घर से बाहर गए हुए थे, तब एक चोर चुपके से उनकी झोपड़ी में घुस आया। उसने हर जगह तलाश की, लेकिन जल्द ही उसे एहसास हुआ कि वहाँ चोरी करने लायक कुछ भी नहीं था। रयोकान के पास न पैसे थे, न कोई कीमती सामान और न ही मुश्किल से गुज़ारा करने लायक भोजन के अलावा कुछ और।

जब चोर खाली हाथ लौटने ही वाला था, तभी रयोकान वापस आ गए और उन्होंने उसे चोरी करते हुए पकड़ लिया। लेकिन गुस्सा होने या डरने के बजाय, उस दयालु गुरु ने चोर की ओर गहरी करुणा से देखा।

रयोकान ने धीरे से कहा, “तुम पहाड़ पार करके मुझसे मिलने इतनी दूर आए हो। तुम्हें खाली हाथ नहीं लौटना चाहिए। कृपया, मेरे ये कपड़े उपहार में ले जाओ।”

चोर यह सुनकर पूरी तरह हैरान रह गया। इससे पहले कि वह कुछ कह पाता, रयोकान ने अपने वस्त्र उतारकर उसके हाथों में थमा दिए।

उस अनजान साधु की अपार दयालुता देखकर चोर समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। वह कपड़े लेकर तुरंत अँधेरी रात में भाग गया।

रयोकान अपनी खाली झोपड़ी के बरामदे में बिल्कुल निर्वस्त्र बैठ गए। ठंडी रात की हवा में उनका शरीर थोड़ा काँप रहा था। उन्होंने ऊपर आकाश की ओर देखा, जहाँ पूर्णिमा का चाँद अपनी पूरी चमक के साथ जगमगा रहा था। उसकी सुंदर, शांत रोशनी पूरे प्राकृतिक दृश्य को नहला रही थी।

रयोकान मुस्कुराए और धीरे से बुदबुदाए, “बेचारा! काश, मैं उसे यह सुंदर चाँद भी दे पाता।”
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